Wednesday, 8 November 2017

भारतीय रेलवे- लाइफ लाइन की लाइफ को बिगाड़ने का जिम्मेदार कौन?

भरतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है , लगभग 92000 किलोमीटर का रनिंग ट्रैक है भरतीय रेलवे का जो 65000 किलोमीटर से ज्यादा का रूट कवर करता है जिसमे 7000 से ज्यादा स्टेशन्स है और रोजाना 2 करोड़ से ज्यादा लोग यात्रा करते है लेकिन हमारे इस 172 साल पुराने रेल नेटवर्क को हो क्या गया है या यूं कहें हमारा रेलवे 172 साल में भी कुछ खास तरक्की नही कर पाई ,इतने हादसे हो रहे ना जाने कितने जान माल की छती हो रही है,रेल का नाम सुनकर पहले दिमाग मे चाय-चाय ,गरम समोसे जैसे शब्द कानों में गूंजते हैं और लगता हैं किसी छुट्टी पर जाने की तैयारी हो रही है लेकिन अब कही न कहीं दिमाग में डर भी लगने लगता है एक समय पर रेल को सबसे सुरक्षित और सस्ता साधन माना जाता था ट्रैन को लेकिन शायद अब ना तो वो सुरक्षित है और ना ही उतनी सस्ती।हम बात बुलेट ट्रेन की करते है लेकिन क्या हम सुरक्षित ढंग से साधारण ट्रैन भी चल पा रहे है,ना जाने कितने स्टेशनों और ट्रेनों की घोषणा हर साल बजट में होती हैं लेकिन सालो बीत जाते है फिर भी कागजो से बाहर धरातल पर शायद ही कुछ आ पाता हो, आज से 3 साल जब मैं अपने शहर से दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस से आता था तो किराया 640 रुपये लगता था लेकिन अब 867 से 913 के बीच में ,सेकंड सीटिंग का किराया 30 प्रतिशत बढ़ा दिया लेकिन सुविधाओं में क्या इजाफा हुआ कोई नही जानता, समस्या का समाधान ढूंढने की वजह उससे बचने के तरीके ढूंढते हैं, AC कोच में कम्बल गंदे होने की शिकायत आयी तो उन कंबलों को धुलने का इन्तजाम करने की वजह ये हल निकाला कि कम्बल देना ही बंद कर दिया जाए और AC कोच का टेम्परेचर 24 डिग्री सेट कर दिया जाए,वाह क्या हल है,ट्रेनें 24-24 घंटे लेट चलती है आज की ट्रेन कल आती है पता ही नहीं कब कौन से दिन की ट्रेन आ रही है,कभी कभी तो कैंसिल ही करनी पड़ती है..भैया रेलवे इस देश की लाइफ लाइन है अगर इसी को ऑक्सिजन ऐसे इतनी देरी मे मिलेगी तो इसकी तो सांसे ही थम जाएगी।
ये तो बात हुई रेल मंत्रालय की या सिस्टम की लेकिन हम और आप जैसे लोग भी जो यात्रा करते है वो भी रेलवे की इस हालत के लिए जिम्मेदार है क्योंकि उसे हम अपना नही समझते है और नुकसान पहुचते है आप अच्छी सुविधाओ की अपेक्षा रखते है लेकिन क्या हम अच्छी सुविधाओं के लायक हैं अभी कुछ समय पहले एक नई ट्रेन चली थी तेजस एक्सप्रेस यात्रियों ने उसके हेडफोन चुरा लिए,LED तोड़ दी,क्यों भई अगर खुद की कार पर किसी से गलती से भी स्क्रैच लग जाए तो हम लड़ने को तैयार हो जाते है फिर सरकारी या पब्लिक संपत्ति के साथ ऐसा क्यों, हम गंदगी को लेकर शिकायत करते रहते है लेकिन कभी सोचा है कि गंदगी है भी तो हमारे ही कारण हम ही गंदगी न करे हम ही सफाई रखे।
कहना सिर्फ इतना है कि सबको बदलना पड़ेगा सिर्फ सरकार या सिस्टम को दोष देने से चीजे नही बदलेगी,सोच बदलनी पड़ेगी, अगर हम बदल जाए तो फिर हम किसी भी सरकार या सिस्टम के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा,और वैसे भी रेल किसी भी देश की लाइफ लाइन होती है अगर उसी लाइफ लाइन को खत्म कर देंगे तो ज़िन्दगी कैसे चलेंगी क्योंकि देश के अंदर बहुत सी चीजो का आयात और निर्यात सिर्फ रेल के द्वारा ही होता है। तो इस लाइफ लाइन की ऑक्सिजन सप्लाई सुचारू रूप से चलने दो ताकि इसकी लाइफ और हमारी लाइफ चलती रहे।

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https://youtu.be/WWleK6ZHnmg