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Baatein- nayi aur purani kuch sacchi kuch kahani
Monday, 11 May 2020
Sunday, 20 October 2019
Thursday, 26 September 2019
Tuesday, 1 May 2018
Succes and failure?
सफलता और असफलता इंसान के जीवन के दो पहलू हैं जो असफल हुआ हैं वो सफल भी भी होगा, और फिर से वही बात की सफलता का कोई पैमाना नहीं होता हैं ये। खैर जब तक इंसान सफल नहीं हो जाता तब तक लोग तरह तरह की बातें बनाते है उसके असफल होने का कारण स्वयं उस व्यक्ति को बताते है और सफल हो जाने पर उस व्यक्ति की सफलता के पीछे कई लोग की मेहनत सामने आ जाती हैं कई लोग अलग-अलग तरह से उस व्यक्ति की सफलता में अपना योगदान बताने लगते हैं। मैं आपको रोहन की कहानी सुनाता हूँ।
रोहन एक मिडिल क्लास फैमिली से belong करता था, वो एक एवरेज स्टूडेंट था उसका मन पढ़ाई से ज्यादा म्यूजिक में लगता था ,गाने लिखना,म्यूजिक बनाना और गाने गाना भी। घर वालो को उसका ये शॉक पंसद नहीं था ,घर वाले चाहते थे कि वो सिर्फ पढ़ाई में ध्यान दे। धीरे धीरे वक़्त गुज़रा उसने पढ़ाई पूरी की और उसके बाद उसने अपनी ज़िद्द से म्यूजिक की ट्रेनिंग भी ली और फिर music इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाने के लिए वो मुम्बई चला गया, उसके घर वालों खाश कर उसके पिता ने बहुत मना किया लेकिन वो चला गया। मुंबई पहुँच कर उसका संघर्ष शुरू हुआ ,के महीने बीत गए उससे कोई काम नहीं मिला ,उसके पिता अक्सर उसे यहीं बोलते,"की कब तक घर से पैसे लेकर ज़िंदगी काटोगे तुम्हारे साटी वालर सारे लड़के नौकरी कर रहें, कोई बैंक में तो कोई किसी कंपनी में, देखो रोहन अगर 2-3 महीने में काम नहीं मिलता है तो या तो में तुम्हे खर्च के पैसे नहीं दूंगा ,हां अगर तुम्हें comptetion exam की तैयारी करनी है तो मैं खर्च देता रहूंगा।" इतना कहकर रोहन के पापा फ़ोन काट देते हैं। रोहन अपने भाई से बात करता हैं तो वो भी यही बोलते है कि पापा सही हैं तुमने ऐसी फील्ड चुनी है तो करो स्ट्रगल और वो भी ज्यादा मदद नहीं कर सकता, और बहन ये कह कर बात टाल देती की वो बड़ा हो गया खुद अपना अच्छा बुरा सोचे। रोहन अकेला से पड़ चुका था दोस्त भी ज्यादा बात नही करते थे वीकेंड पर सिर्फ कुछ देर के लिए बातचीत या मुलाकात हो जाती थी। लेकिन उसके एक दोस्त ने किसी तरह उसे एक म्यूजिक कंपनी में जॉब दिल दी और उसको अलग अलग लोगो से मिलवाने लगा कुछ महीनों बाद रोहन को एक music कंपनी ने उसका एल्बम launch करने के लिए बोला।रोहन का एक एल्बम लॉन्च होने के बाद उसके कई गाने हिट होने लगे। और इसी के साथ उसकी सफलता में अपना श्रेय लेने वाले आगे आने लगे जैसे -भाई ने हमेशा motivate किया, पिता ने कहां ,"कि उन्होंने अपने बेटों को पैसे की कमी नहीं होने दी उसके सपनों के बीच में कभी पैसो की कमी नहीं आने दी।" और फिर दोस्तों ने बहन ने और न जाने कितने लोग।
लेकिन सोचने वाली बात हैं कि जब तक रोहन सफल नहीं था तो सिर्फ उसकी गलती थी उसने गलत फील्ड चुनी थी अपने करियर के लिए। लेकिन अब उसकी सफलता में सबका योगदान सिर्फ उस दोस्त को छोड़ कर जिसने उससे काम ढूंढने में मदद की। क्या वीकेंड पर मिल लेना अच्छी दोस्ती और योगदान हैं, जय सिर्फ पैसों के रूप में मदद करना फ़र्ज़ या योगदान हैं, क्या उस इंसान को सफलता न मिलने पर उसके गलत होने का अहसास कराना योगदान हैं? शायद नहीं। क्योंकि योगदान सिर्फ उस दोस्त का हैं जिसने सिर्फ उसको उसके पसंद का काम दिलाने में मदद की।
और ये बिल्कुल गलत है कि सफलता में सबका योगदान और असफलता में सिर्फ असफल होने वाले की गलती और नाकामी।
रोहन एक मिडिल क्लास फैमिली से belong करता था, वो एक एवरेज स्टूडेंट था उसका मन पढ़ाई से ज्यादा म्यूजिक में लगता था ,गाने लिखना,म्यूजिक बनाना और गाने गाना भी। घर वालो को उसका ये शॉक पंसद नहीं था ,घर वाले चाहते थे कि वो सिर्फ पढ़ाई में ध्यान दे। धीरे धीरे वक़्त गुज़रा उसने पढ़ाई पूरी की और उसके बाद उसने अपनी ज़िद्द से म्यूजिक की ट्रेनिंग भी ली और फिर music इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाने के लिए वो मुम्बई चला गया, उसके घर वालों खाश कर उसके पिता ने बहुत मना किया लेकिन वो चला गया। मुंबई पहुँच कर उसका संघर्ष शुरू हुआ ,के महीने बीत गए उससे कोई काम नहीं मिला ,उसके पिता अक्सर उसे यहीं बोलते,"की कब तक घर से पैसे लेकर ज़िंदगी काटोगे तुम्हारे साटी वालर सारे लड़के नौकरी कर रहें, कोई बैंक में तो कोई किसी कंपनी में, देखो रोहन अगर 2-3 महीने में काम नहीं मिलता है तो या तो में तुम्हे खर्च के पैसे नहीं दूंगा ,हां अगर तुम्हें comptetion exam की तैयारी करनी है तो मैं खर्च देता रहूंगा।" इतना कहकर रोहन के पापा फ़ोन काट देते हैं। रोहन अपने भाई से बात करता हैं तो वो भी यही बोलते है कि पापा सही हैं तुमने ऐसी फील्ड चुनी है तो करो स्ट्रगल और वो भी ज्यादा मदद नहीं कर सकता, और बहन ये कह कर बात टाल देती की वो बड़ा हो गया खुद अपना अच्छा बुरा सोचे। रोहन अकेला से पड़ चुका था दोस्त भी ज्यादा बात नही करते थे वीकेंड पर सिर्फ कुछ देर के लिए बातचीत या मुलाकात हो जाती थी। लेकिन उसके एक दोस्त ने किसी तरह उसे एक म्यूजिक कंपनी में जॉब दिल दी और उसको अलग अलग लोगो से मिलवाने लगा कुछ महीनों बाद रोहन को एक music कंपनी ने उसका एल्बम launch करने के लिए बोला।रोहन का एक एल्बम लॉन्च होने के बाद उसके कई गाने हिट होने लगे। और इसी के साथ उसकी सफलता में अपना श्रेय लेने वाले आगे आने लगे जैसे -भाई ने हमेशा motivate किया, पिता ने कहां ,"कि उन्होंने अपने बेटों को पैसे की कमी नहीं होने दी उसके सपनों के बीच में कभी पैसो की कमी नहीं आने दी।" और फिर दोस्तों ने बहन ने और न जाने कितने लोग।
लेकिन सोचने वाली बात हैं कि जब तक रोहन सफल नहीं था तो सिर्फ उसकी गलती थी उसने गलत फील्ड चुनी थी अपने करियर के लिए। लेकिन अब उसकी सफलता में सबका योगदान सिर्फ उस दोस्त को छोड़ कर जिसने उससे काम ढूंढने में मदद की। क्या वीकेंड पर मिल लेना अच्छी दोस्ती और योगदान हैं, जय सिर्फ पैसों के रूप में मदद करना फ़र्ज़ या योगदान हैं, क्या उस इंसान को सफलता न मिलने पर उसके गलत होने का अहसास कराना योगदान हैं? शायद नहीं। क्योंकि योगदान सिर्फ उस दोस्त का हैं जिसने सिर्फ उसको उसके पसंद का काम दिलाने में मदद की।
और ये बिल्कुल गलत है कि सफलता में सबका योगदान और असफलता में सिर्फ असफल होने वाले की गलती और नाकामी।
Wednesday, 25 April 2018
Mohabbat Main
मोहब्बत में सूरज जुगनू को तरसते हैं
होकर प्यार का सागर, प्यार की ही एक बूंद को भटकते हैं।
इश्क़ की बहती धारा में रेगिस्तान बसते हैं
दिल तोड़ने वाले भरे ज़माने में हँसते है और सच्ची मोहब्बत वाले किसी कोने में सुबकते हैं
गुलाब की भेंट पर भी सिर्फ कैक्टस के गुलदस्ते हैं ।
प्यार की कोमल सी डोर पर बेवफाई की गाठे कसते हैं
मोहब्बत में तो बस हार हैं तभी अक्सर लोग जीतते हैं।
इश्क़ में नहीं कोई मंज़िल इसमें तो सिर्फ रस्ते हैं
मोहब्बत में सूरज जुगनू को तरसते हैं।
होकर प्यार का सागर, प्यार की ही एक बूंद को भटकते हैं।
इश्क़ की बहती धारा में रेगिस्तान बसते हैं
दिल तोड़ने वाले भरे ज़माने में हँसते है और सच्ची मोहब्बत वाले किसी कोने में सुबकते हैं
गुलाब की भेंट पर भी सिर्फ कैक्टस के गुलदस्ते हैं ।
प्यार की कोमल सी डोर पर बेवफाई की गाठे कसते हैं
मोहब्बत में तो बस हार हैं तभी अक्सर लोग जीतते हैं।
इश्क़ में नहीं कोई मंज़िल इसमें तो सिर्फ रस्ते हैं
मोहब्बत में सूरज जुगनू को तरसते हैं।
Saturday, 14 April 2018
खुद के लिए खुद की सोच
क्या हम कभी भी किसी के साथ कुछ करने से पहले या फिर किसी को कुछ बोलने से पहले सोचते हैं कि जो हम कह या कर रहे है वो हमारे साथ या हमारे किसी अपने के साथ भी हो सकता हैं? शायद नहीं सोचते हैं लेकिन सोचना चाहिए। एक बहुत छोटी सी कहानी सुनाता हूं आपको।
राहुल और संजना एक दूसरे को काफी टाइम से जानते हैं शायद दोनों एक दूसरे को चाहते भी हैं। राहुल के घर उसकी बहन को देखने लड़के वाले आ रहे हैं सब लोग घर में तैयारी कर रहे हैं, राहुल के मोबाइल पर संजना का कॉल आ रहा हैं लेकिन वो कॉल पिक नहीं कर पाता।लड़की वाले राहुल की बहन को देखकर चलर जाते हैं।
राहुल संजना से मिलने गया है, वो संजना से पूछता हैं कि वो बार- बार कॉल क्यों कर रही थी, संजना राहुल को बताती है, "राहुल में मैंने आज अपने घर पर हमारे बारे में बात की थी।
राहुल संजना से- क्या बात की थी।
संजना राहुल से- अपने रिश्ते की बात ,मतलब शादी की बात।
राहुल संजना से- शादी तुम पागल हो ,शादी कहाँ से आ गई... हम सिर्फ दोस्त हैं
संजना राहुल से- दोस्त हैं...
राहुल संजना से- चलो दोस्त नहीं गर्लफ्रैंड सही... लेकिन यार इसका मतलब शादी तो नहीं कर सकता।
संजना राहुल से- लेकिन तुमने तो कहा था कि...और सब जानते हैं हमारे बारे में ,मैंने तो घर पर भी बता दिया है, और तुम तो हमारी सोसाइटी को तरह तरह की बातें होगी...और लड़की में ही कमियाँ निकाली
राहुल संजना से- जो भी हो लेकिन जो तुम चाहती हो वो नहीं हो सकता , कोई और लड़का देख लो जो तुमसे शादी कर सके।
इतना कहकर राहुल वहां से चला जाता हैं। राहुल को अपने घर पहुँचने पर चलता हैं की जो लड़के वाले उसकी बहन को देखने उन्होंने रिश्ते के लिए मना कर दिया हैं, ये सुनकर राहुल अपनी बहन के पास जाता हैं और उसकी बहन उसे बताती हैं," की उस लड़के ने ये कह कर मना कर दिया की उसका दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड था उसने मुझे उसके साथ कई बार देखा था, और उसने ये भी कहाँ की अपने बॉयफ्रेंड से ही शादी कर ले या कोई नया बॉयफ्रेंड बना ले जो उससे शादी कर सके"।
अपनी बहन की बातें सुनकर राहुल को वही सब बातें याद आ रही थी जो उसने संजना से कही थी।क्या हम किसी दूसरे के साथ कुछ भी करते वक़्त खुद को उस जगह रख कर देखते हैं? शायद नही, क्योंकि अगर हम ऐसा करे तो गलती करने की संभावना कम हो। और दूसरी बात क्या किसी को उसके पास्ट को सिर्फ आधे अधूरे तरीके से जानकर उस इंसान को judge करना सही हैं? Past present और future शायद कभी एक जैसे नही हो सकते । और रही बात समाज की तो समाज हमारा ही बनाया हुआ है अगर हम सही है,हमारे कर्म सही है, हमारी भावनाएं सही है तो सब सही है। बाकी हमे हर काम ये सोच करना चाहिए कि जो हम किसी और के साथ कर रहे है शायद वो कभी ना कभी किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आ सकता है।
राहुल और संजना एक दूसरे को काफी टाइम से जानते हैं शायद दोनों एक दूसरे को चाहते भी हैं। राहुल के घर उसकी बहन को देखने लड़के वाले आ रहे हैं सब लोग घर में तैयारी कर रहे हैं, राहुल के मोबाइल पर संजना का कॉल आ रहा हैं लेकिन वो कॉल पिक नहीं कर पाता।लड़की वाले राहुल की बहन को देखकर चलर जाते हैं।
राहुल संजना से मिलने गया है, वो संजना से पूछता हैं कि वो बार- बार कॉल क्यों कर रही थी, संजना राहुल को बताती है, "राहुल में मैंने आज अपने घर पर हमारे बारे में बात की थी।
राहुल संजना से- क्या बात की थी।
संजना राहुल से- अपने रिश्ते की बात ,मतलब शादी की बात।
राहुल संजना से- शादी तुम पागल हो ,शादी कहाँ से आ गई... हम सिर्फ दोस्त हैं
संजना राहुल से- दोस्त हैं...
राहुल संजना से- चलो दोस्त नहीं गर्लफ्रैंड सही... लेकिन यार इसका मतलब शादी तो नहीं कर सकता।
संजना राहुल से- लेकिन तुमने तो कहा था कि...और सब जानते हैं हमारे बारे में ,मैंने तो घर पर भी बता दिया है, और तुम तो हमारी सोसाइटी को तरह तरह की बातें होगी...और लड़की में ही कमियाँ निकाली
राहुल संजना से- जो भी हो लेकिन जो तुम चाहती हो वो नहीं हो सकता , कोई और लड़का देख लो जो तुमसे शादी कर सके।
इतना कहकर राहुल वहां से चला जाता हैं। राहुल को अपने घर पहुँचने पर चलता हैं की जो लड़के वाले उसकी बहन को देखने उन्होंने रिश्ते के लिए मना कर दिया हैं, ये सुनकर राहुल अपनी बहन के पास जाता हैं और उसकी बहन उसे बताती हैं," की उस लड़के ने ये कह कर मना कर दिया की उसका दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड था उसने मुझे उसके साथ कई बार देखा था, और उसने ये भी कहाँ की अपने बॉयफ्रेंड से ही शादी कर ले या कोई नया बॉयफ्रेंड बना ले जो उससे शादी कर सके"।
अपनी बहन की बातें सुनकर राहुल को वही सब बातें याद आ रही थी जो उसने संजना से कही थी।क्या हम किसी दूसरे के साथ कुछ भी करते वक़्त खुद को उस जगह रख कर देखते हैं? शायद नही, क्योंकि अगर हम ऐसा करे तो गलती करने की संभावना कम हो। और दूसरी बात क्या किसी को उसके पास्ट को सिर्फ आधे अधूरे तरीके से जानकर उस इंसान को judge करना सही हैं? Past present और future शायद कभी एक जैसे नही हो सकते । और रही बात समाज की तो समाज हमारा ही बनाया हुआ है अगर हम सही है,हमारे कर्म सही है, हमारी भावनाएं सही है तो सब सही है। बाकी हमे हर काम ये सोच करना चाहिए कि जो हम किसी और के साथ कर रहे है शायद वो कभी ना कभी किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आ सकता है।
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तलाश को तलाशते रहने से कभी तलाश खत्म नहीं होगी, अगर अपनी तलाश पूरी करनी हैं तो खुद तलाश बन जाओ और जो आपको तलाश ले वही आपकअपनी तलाश है।
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वो दिन, वो लम्हे नकली थे,लेकिन अच्छे थे वो झूठे थे लेकिन हम तो सच्चे थे वो बातें बचकानी थी,लेकिन हम तो बच्चें थे वो रिश्ते कच्चे थे लेकि...