Saturday, 11 November 2017

Dream- भोर का सपना

आज भोर को एक सपना आया था
सपने में उसके जैसी एक खूबसूरत परी को पाया था
था विश्वास की भोर का सपना तो सच होना था
इसी विश्वास में जब पूरा जग जागा में सोया था
सपने के भीतर उसमे ही तो खोया था
उसने ही तो मुझे मेरी धड़कन को सुनाया था
उसने ही तो मुझे प्यार का प्यार से अहसास कराया था
उसने ही तो इस जहांन में मेरा जहां बनाया था
उसने ही मंजिल बनकर मुझे एक प्यार का रास्ता दिखाया था
मेरा सब कुछ उसमे ही तो समाया था
आँख खोली तो उसको नही पाया था
हुआ अहसास कि ये तो रात का सपना था ,जिसमें ये भोर का सपना आया था
 जब पूरा जग सोया था में जागा था
मेरी पलकों को आंसुओ ने भिगोया था
सपने-सपने में मैंने अपना सब कुछ खोया था
पूरा जग सोया था और मैं सिर्फ रोया था
मैंने सपने-सपने में अपना सब कुछ खोया था

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