Monday, 20 November 2017

मैं फिर से आ गया वही
पर तुम नहीं,
मुझे राह मिली नई
पर मंज़िल नहीं
क्योंकि इस राह में तुम नहीं,
मैं तुम्हारे लिए हमेशा यही
पर तुम मेरे लिए कभी नहीं,
मैं तुम्हारे इर्द गिर्द हमेशा से ही
पर तुम सदा दूर ही रही,
होगी मुक़मल ये राह
मिलेंगी मंज़िल यही
हैं मेरे दिल को यकीं,
मैं तुम्हारे इन्तज़ार में यही
पर तुम नहीं
पर तुम नहीं

No comments:

Post a Comment

https://youtu.be/WWleK6ZHnmg