Friday, 26 January 2018

Kya kar baithe

भविष्य बनाते -बनाते खुद को इतिहास बना बैठे है,
पास आने की आस में दूरियां बना बैठे हैं,
कुछ पाने की हसरत में सब कुछ गवां बैठे हैं,
रोशनी की तलाश में खुद को अंधेरा बना बैठे है,
सूरज की आस में चाँद भी गवां बैठे है,
सपनो के पीछे भागते-भागते हकीकत से रिश्ता मिटा बैठे है,
खुद को कुछ बनाने की कोशिश में खुद को ही खत्म कर बैठे है,
भविष्य बनाते-बनाते खुद को इतिहास बना बैठे है,
                           

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https://youtu.be/WWleK6ZHnmg