सफलता और असफलता इंसान के जीवन के दो पहलू हैं जो असफल हुआ हैं वो सफल भी भी होगा, और फिर से वही बात की सफलता का कोई पैमाना नहीं होता हैं ये। खैर जब तक इंसान सफल नहीं हो जाता तब तक लोग तरह तरह की बातें बनाते है उसके असफल होने का कारण स्वयं उस व्यक्ति को बताते है और सफल हो जाने पर उस व्यक्ति की सफलता के पीछे कई लोग की मेहनत सामने आ जाती हैं कई लोग अलग-अलग तरह से उस व्यक्ति की सफलता में अपना योगदान बताने लगते हैं। मैं आपको रोहन की कहानी सुनाता हूँ।
रोहन एक मिडिल क्लास फैमिली से belong करता था, वो एक एवरेज स्टूडेंट था उसका मन पढ़ाई से ज्यादा म्यूजिक में लगता था ,गाने लिखना,म्यूजिक बनाना और गाने गाना भी। घर वालो को उसका ये शॉक पंसद नहीं था ,घर वाले चाहते थे कि वो सिर्फ पढ़ाई में ध्यान दे। धीरे धीरे वक़्त गुज़रा उसने पढ़ाई पूरी की और उसके बाद उसने अपनी ज़िद्द से म्यूजिक की ट्रेनिंग भी ली और फिर music इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाने के लिए वो मुम्बई चला गया, उसके घर वालों खाश कर उसके पिता ने बहुत मना किया लेकिन वो चला गया। मुंबई पहुँच कर उसका संघर्ष शुरू हुआ ,के महीने बीत गए उससे कोई काम नहीं मिला ,उसके पिता अक्सर उसे यहीं बोलते,"की कब तक घर से पैसे लेकर ज़िंदगी काटोगे तुम्हारे साटी वालर सारे लड़के नौकरी कर रहें, कोई बैंक में तो कोई किसी कंपनी में, देखो रोहन अगर 2-3 महीने में काम नहीं मिलता है तो या तो में तुम्हे खर्च के पैसे नहीं दूंगा ,हां अगर तुम्हें comptetion exam की तैयारी करनी है तो मैं खर्च देता रहूंगा।" इतना कहकर रोहन के पापा फ़ोन काट देते हैं। रोहन अपने भाई से बात करता हैं तो वो भी यही बोलते है कि पापा सही हैं तुमने ऐसी फील्ड चुनी है तो करो स्ट्रगल और वो भी ज्यादा मदद नहीं कर सकता, और बहन ये कह कर बात टाल देती की वो बड़ा हो गया खुद अपना अच्छा बुरा सोचे। रोहन अकेला से पड़ चुका था दोस्त भी ज्यादा बात नही करते थे वीकेंड पर सिर्फ कुछ देर के लिए बातचीत या मुलाकात हो जाती थी। लेकिन उसके एक दोस्त ने किसी तरह उसे एक म्यूजिक कंपनी में जॉब दिल दी और उसको अलग अलग लोगो से मिलवाने लगा कुछ महीनों बाद रोहन को एक music कंपनी ने उसका एल्बम launch करने के लिए बोला।रोहन का एक एल्बम लॉन्च होने के बाद उसके कई गाने हिट होने लगे। और इसी के साथ उसकी सफलता में अपना श्रेय लेने वाले आगे आने लगे जैसे -भाई ने हमेशा motivate किया, पिता ने कहां ,"कि उन्होंने अपने बेटों को पैसे की कमी नहीं होने दी उसके सपनों के बीच में कभी पैसो की कमी नहीं आने दी।" और फिर दोस्तों ने बहन ने और न जाने कितने लोग।
लेकिन सोचने वाली बात हैं कि जब तक रोहन सफल नहीं था तो सिर्फ उसकी गलती थी उसने गलत फील्ड चुनी थी अपने करियर के लिए। लेकिन अब उसकी सफलता में सबका योगदान सिर्फ उस दोस्त को छोड़ कर जिसने उससे काम ढूंढने में मदद की। क्या वीकेंड पर मिल लेना अच्छी दोस्ती और योगदान हैं, जय सिर्फ पैसों के रूप में मदद करना फ़र्ज़ या योगदान हैं, क्या उस इंसान को सफलता न मिलने पर उसके गलत होने का अहसास कराना योगदान हैं? शायद नहीं। क्योंकि योगदान सिर्फ उस दोस्त का हैं जिसने सिर्फ उसको उसके पसंद का काम दिलाने में मदद की।
और ये बिल्कुल गलत है कि सफलता में सबका योगदान और असफलता में सिर्फ असफल होने वाले की गलती और नाकामी।
रोहन एक मिडिल क्लास फैमिली से belong करता था, वो एक एवरेज स्टूडेंट था उसका मन पढ़ाई से ज्यादा म्यूजिक में लगता था ,गाने लिखना,म्यूजिक बनाना और गाने गाना भी। घर वालो को उसका ये शॉक पंसद नहीं था ,घर वाले चाहते थे कि वो सिर्फ पढ़ाई में ध्यान दे। धीरे धीरे वक़्त गुज़रा उसने पढ़ाई पूरी की और उसके बाद उसने अपनी ज़िद्द से म्यूजिक की ट्रेनिंग भी ली और फिर music इंडस्ट्री में ही अपना कैरियर बनाने के लिए वो मुम्बई चला गया, उसके घर वालों खाश कर उसके पिता ने बहुत मना किया लेकिन वो चला गया। मुंबई पहुँच कर उसका संघर्ष शुरू हुआ ,के महीने बीत गए उससे कोई काम नहीं मिला ,उसके पिता अक्सर उसे यहीं बोलते,"की कब तक घर से पैसे लेकर ज़िंदगी काटोगे तुम्हारे साटी वालर सारे लड़के नौकरी कर रहें, कोई बैंक में तो कोई किसी कंपनी में, देखो रोहन अगर 2-3 महीने में काम नहीं मिलता है तो या तो में तुम्हे खर्च के पैसे नहीं दूंगा ,हां अगर तुम्हें comptetion exam की तैयारी करनी है तो मैं खर्च देता रहूंगा।" इतना कहकर रोहन के पापा फ़ोन काट देते हैं। रोहन अपने भाई से बात करता हैं तो वो भी यही बोलते है कि पापा सही हैं तुमने ऐसी फील्ड चुनी है तो करो स्ट्रगल और वो भी ज्यादा मदद नहीं कर सकता, और बहन ये कह कर बात टाल देती की वो बड़ा हो गया खुद अपना अच्छा बुरा सोचे। रोहन अकेला से पड़ चुका था दोस्त भी ज्यादा बात नही करते थे वीकेंड पर सिर्फ कुछ देर के लिए बातचीत या मुलाकात हो जाती थी। लेकिन उसके एक दोस्त ने किसी तरह उसे एक म्यूजिक कंपनी में जॉब दिल दी और उसको अलग अलग लोगो से मिलवाने लगा कुछ महीनों बाद रोहन को एक music कंपनी ने उसका एल्बम launch करने के लिए बोला।रोहन का एक एल्बम लॉन्च होने के बाद उसके कई गाने हिट होने लगे। और इसी के साथ उसकी सफलता में अपना श्रेय लेने वाले आगे आने लगे जैसे -भाई ने हमेशा motivate किया, पिता ने कहां ,"कि उन्होंने अपने बेटों को पैसे की कमी नहीं होने दी उसके सपनों के बीच में कभी पैसो की कमी नहीं आने दी।" और फिर दोस्तों ने बहन ने और न जाने कितने लोग।
लेकिन सोचने वाली बात हैं कि जब तक रोहन सफल नहीं था तो सिर्फ उसकी गलती थी उसने गलत फील्ड चुनी थी अपने करियर के लिए। लेकिन अब उसकी सफलता में सबका योगदान सिर्फ उस दोस्त को छोड़ कर जिसने उससे काम ढूंढने में मदद की। क्या वीकेंड पर मिल लेना अच्छी दोस्ती और योगदान हैं, जय सिर्फ पैसों के रूप में मदद करना फ़र्ज़ या योगदान हैं, क्या उस इंसान को सफलता न मिलने पर उसके गलत होने का अहसास कराना योगदान हैं? शायद नहीं। क्योंकि योगदान सिर्फ उस दोस्त का हैं जिसने सिर्फ उसको उसके पसंद का काम दिलाने में मदद की।
और ये बिल्कुल गलत है कि सफलता में सबका योगदान और असफलता में सिर्फ असफल होने वाले की गलती और नाकामी।
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