Wednesday, 25 April 2018

Mohabbat Main

मोहब्बत में सूरज जुगनू को तरसते हैं
 होकर प्यार का सागर, प्यार की ही एक बूंद को भटकते हैं।
इश्क़ की बहती धारा में रेगिस्तान बसते हैं
दिल तोड़ने वाले भरे ज़माने में हँसते है और सच्ची मोहब्बत वाले  किसी कोने में सुबकते हैं
गुलाब की भेंट पर भी सिर्फ कैक्टस के गुलदस्ते हैं ।
प्यार की कोमल सी डोर पर बेवफाई की गाठे कसते हैं
मोहब्बत में तो बस हार हैं तभी अक्सर लोग जीतते हैं।
इश्क़ में नहीं कोई मंज़िल इसमें तो सिर्फ रस्ते हैं
मोहब्बत में सूरज जुगनू को तरसते हैं।

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https://youtu.be/WWleK6ZHnmg