क्या हम कभी भी किसी के साथ कुछ करने से पहले या फिर किसी को कुछ बोलने से पहले सोचते हैं कि जो हम कह या कर रहे है वो हमारे साथ या हमारे किसी अपने के साथ भी हो सकता हैं? शायद नहीं सोचते हैं लेकिन सोचना चाहिए। एक बहुत छोटी सी कहानी सुनाता हूं आपको।
राहुल और संजना एक दूसरे को काफी टाइम से जानते हैं शायद दोनों एक दूसरे को चाहते भी हैं। राहुल के घर उसकी बहन को देखने लड़के वाले आ रहे हैं सब लोग घर में तैयारी कर रहे हैं, राहुल के मोबाइल पर संजना का कॉल आ रहा हैं लेकिन वो कॉल पिक नहीं कर पाता।लड़की वाले राहुल की बहन को देखकर चलर जाते हैं।
राहुल संजना से मिलने गया है, वो संजना से पूछता हैं कि वो बार- बार कॉल क्यों कर रही थी, संजना राहुल को बताती है, "राहुल में मैंने आज अपने घर पर हमारे बारे में बात की थी।
राहुल संजना से- क्या बात की थी।
संजना राहुल से- अपने रिश्ते की बात ,मतलब शादी की बात।
राहुल संजना से- शादी तुम पागल हो ,शादी कहाँ से आ गई... हम सिर्फ दोस्त हैं
संजना राहुल से- दोस्त हैं...
राहुल संजना से- चलो दोस्त नहीं गर्लफ्रैंड सही... लेकिन यार इसका मतलब शादी तो नहीं कर सकता।
संजना राहुल से- लेकिन तुमने तो कहा था कि...और सब जानते हैं हमारे बारे में ,मैंने तो घर पर भी बता दिया है, और तुम तो हमारी सोसाइटी को तरह तरह की बातें होगी...और लड़की में ही कमियाँ निकाली
राहुल संजना से- जो भी हो लेकिन जो तुम चाहती हो वो नहीं हो सकता , कोई और लड़का देख लो जो तुमसे शादी कर सके।
इतना कहकर राहुल वहां से चला जाता हैं। राहुल को अपने घर पहुँचने पर चलता हैं की जो लड़के वाले उसकी बहन को देखने उन्होंने रिश्ते के लिए मना कर दिया हैं, ये सुनकर राहुल अपनी बहन के पास जाता हैं और उसकी बहन उसे बताती हैं," की उस लड़के ने ये कह कर मना कर दिया की उसका दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड था उसने मुझे उसके साथ कई बार देखा था, और उसने ये भी कहाँ की अपने बॉयफ्रेंड से ही शादी कर ले या कोई नया बॉयफ्रेंड बना ले जो उससे शादी कर सके"।
अपनी बहन की बातें सुनकर राहुल को वही सब बातें याद आ रही थी जो उसने संजना से कही थी।क्या हम किसी दूसरे के साथ कुछ भी करते वक़्त खुद को उस जगह रख कर देखते हैं? शायद नही, क्योंकि अगर हम ऐसा करे तो गलती करने की संभावना कम हो। और दूसरी बात क्या किसी को उसके पास्ट को सिर्फ आधे अधूरे तरीके से जानकर उस इंसान को judge करना सही हैं? Past present और future शायद कभी एक जैसे नही हो सकते । और रही बात समाज की तो समाज हमारा ही बनाया हुआ है अगर हम सही है,हमारे कर्म सही है, हमारी भावनाएं सही है तो सब सही है। बाकी हमे हर काम ये सोच करना चाहिए कि जो हम किसी और के साथ कर रहे है शायद वो कभी ना कभी किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आ सकता है।
राहुल और संजना एक दूसरे को काफी टाइम से जानते हैं शायद दोनों एक दूसरे को चाहते भी हैं। राहुल के घर उसकी बहन को देखने लड़के वाले आ रहे हैं सब लोग घर में तैयारी कर रहे हैं, राहुल के मोबाइल पर संजना का कॉल आ रहा हैं लेकिन वो कॉल पिक नहीं कर पाता।लड़की वाले राहुल की बहन को देखकर चलर जाते हैं।
राहुल संजना से मिलने गया है, वो संजना से पूछता हैं कि वो बार- बार कॉल क्यों कर रही थी, संजना राहुल को बताती है, "राहुल में मैंने आज अपने घर पर हमारे बारे में बात की थी।
राहुल संजना से- क्या बात की थी।
संजना राहुल से- अपने रिश्ते की बात ,मतलब शादी की बात।
राहुल संजना से- शादी तुम पागल हो ,शादी कहाँ से आ गई... हम सिर्फ दोस्त हैं
संजना राहुल से- दोस्त हैं...
राहुल संजना से- चलो दोस्त नहीं गर्लफ्रैंड सही... लेकिन यार इसका मतलब शादी तो नहीं कर सकता।
संजना राहुल से- लेकिन तुमने तो कहा था कि...और सब जानते हैं हमारे बारे में ,मैंने तो घर पर भी बता दिया है, और तुम तो हमारी सोसाइटी को तरह तरह की बातें होगी...और लड़की में ही कमियाँ निकाली
राहुल संजना से- जो भी हो लेकिन जो तुम चाहती हो वो नहीं हो सकता , कोई और लड़का देख लो जो तुमसे शादी कर सके।
इतना कहकर राहुल वहां से चला जाता हैं। राहुल को अपने घर पहुँचने पर चलता हैं की जो लड़के वाले उसकी बहन को देखने उन्होंने रिश्ते के लिए मना कर दिया हैं, ये सुनकर राहुल अपनी बहन के पास जाता हैं और उसकी बहन उसे बताती हैं," की उस लड़के ने ये कह कर मना कर दिया की उसका दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड था उसने मुझे उसके साथ कई बार देखा था, और उसने ये भी कहाँ की अपने बॉयफ्रेंड से ही शादी कर ले या कोई नया बॉयफ्रेंड बना ले जो उससे शादी कर सके"।
अपनी बहन की बातें सुनकर राहुल को वही सब बातें याद आ रही थी जो उसने संजना से कही थी।क्या हम किसी दूसरे के साथ कुछ भी करते वक़्त खुद को उस जगह रख कर देखते हैं? शायद नही, क्योंकि अगर हम ऐसा करे तो गलती करने की संभावना कम हो। और दूसरी बात क्या किसी को उसके पास्ट को सिर्फ आधे अधूरे तरीके से जानकर उस इंसान को judge करना सही हैं? Past present और future शायद कभी एक जैसे नही हो सकते । और रही बात समाज की तो समाज हमारा ही बनाया हुआ है अगर हम सही है,हमारे कर्म सही है, हमारी भावनाएं सही है तो सब सही है। बाकी हमे हर काम ये सोच करना चाहिए कि जो हम किसी और के साथ कर रहे है शायद वो कभी ना कभी किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आ सकता है।
No comments:
Post a Comment