हम अक्सर लोगों को हार मानते देखते हैं, हार अपने लक्ष्य से हार अपनी मंज़िल से ।पता नही क्यों,लोग मंज़िल तक पहुँचने के सफर से डरते क्यों है इतना क्योंकि शायद वो सफर का आनंद लेना नही जानते, जबकि सच ये है कि मज़ा ऑयर अहमियत सफर की ज्यादा है मंजिल से। हमे अपनी ज़िंदगी से ही उदाहरण लेने चाहिए, जैसे मैं जब भी कोई ट्रिप पर बचपन मे फैमिली के साथ जाता था या अब भी जाता हूं तो सबसे ज्यादा खुशी सफर की होती है ट्रैन में या कार में मज़े करेगे इस होटल ऑयर रुकेंगे रास्ते मे उस रेस्टोरेंट मे खाना खायेंगे वगैरह-वगैरह। लोग अमरनाथ और वैष्णो देवी दर्शन के लिए जाते है तो वो जो कई घंटों का जो रास्ता या चढ़ाई होती है दर्शन से पहले की उसी को एन्जॉय करते है और आगे उसी की मेमोरीज शेयर करते है दर्शन तो दो मिनट के भी नही होते है। हमारे बोर्ड्स के एग्जाम या कोई भी एग्जाम से पहले हम पूरे साल exited रहते है प्रिपरेशन करते है ग्रुप स्टडी करते है लेकिन एग्जाम 3 घंटे में हो जाता है और रिजल्ट 1 मिनट में आ जाता है। शादी से पहले सारी exitement और खुशियां pre weeding functions की होती है सभी लोगो का गेटटोगेथेर होता है और शादी तो कुछ घंटों में हो जाती है और नेक्स्ट डे सभी गेस्ट अपने घर वापस। हम कोई काम करते है तो वो हो गया उसके बाद क्या वो तो एक झटके मे हो गया अब क्या नया काम नई मंज़िल नया रास्ता..कोई फ़िल्म बनती है वो release एक दिन में हो गयी लेकिन सफर तो कई महीनों के था.., एक माँ भी अपने बच्चे के जन्म से पहले के 9 महीनों के सफर को सबसे ज्यादा खुशी से जीती होगी ,और हम भी अक्सर सफल लोगो के सफलता को नही जानना चाहते हम उनके सफलता तक पहुंचने के रास्ते हो जानना की उत्सुकता रखते है। हमते carrier सेट हो जाता है जॉब मिल जाती है लेकिन हम उस जॉब तक के रास्ते को याद करते है स्कूल से कॉलेज तक।
तो फ्रेंड्स मैं इन examples से सिर्फ इतना कहना चाहता था कि यार मंज़िल जितनी इम्पोर्टेन्ट है उतना ही इम्पॉर्टेन्ट रास्ता भी है और कोई रास्ता कठिन नही होता है बस रास्ते को रास्ता नहीं मानो उसको ज़िंदगी मानकर जीना सीखो क्योंकि ज़िन्दगी में भी एक पल में जन्म होता है और एक ही पल में मृत्यु, लोगो को किसी के जन्म खुशी कुछ ज्यादा पलों की होती है और मृत्यु का गम भी कुछ ज्यादा पलों का उसके बाद फिर सारी चीजें नॉर्मल तो जन्म और मृत्यु के बीच जो चीज़ है जो समय है जो ज़िंदगी है वही आपका सफर है और शायद मंज़िल भी और रास्ते मे ही हमे कई मंज़िले मिलती है उनको जी कर देखो बहुत मज़ा आता है सच्ची मे ...क्योंकि इन रास्तो मे प्यार है,मोहब्बत है,अपने है,दोस्त है,यार है,हंसी है ,खुशी है,बहार है और हाँ मंज़िल भी...तो जन्म हो चुका है सफर शुरू करो ज़िदंगी का जब तक साँसे हैं इस सफर मे अनगिनत मंज़िले हैं ढूंढो जल्दी से..
बिना रास्ते पर निकले मंज़िल का दीदार नही होता
रास्तो से बिना प्यार किए सफर पार नही होता
तो फ्रेंड्स मैं इन examples से सिर्फ इतना कहना चाहता था कि यार मंज़िल जितनी इम्पोर्टेन्ट है उतना ही इम्पॉर्टेन्ट रास्ता भी है और कोई रास्ता कठिन नही होता है बस रास्ते को रास्ता नहीं मानो उसको ज़िंदगी मानकर जीना सीखो क्योंकि ज़िन्दगी में भी एक पल में जन्म होता है और एक ही पल में मृत्यु, लोगो को किसी के जन्म खुशी कुछ ज्यादा पलों की होती है और मृत्यु का गम भी कुछ ज्यादा पलों का उसके बाद फिर सारी चीजें नॉर्मल तो जन्म और मृत्यु के बीच जो चीज़ है जो समय है जो ज़िंदगी है वही आपका सफर है और शायद मंज़िल भी और रास्ते मे ही हमे कई मंज़िले मिलती है उनको जी कर देखो बहुत मज़ा आता है सच्ची मे ...क्योंकि इन रास्तो मे प्यार है,मोहब्बत है,अपने है,दोस्त है,यार है,हंसी है ,खुशी है,बहार है और हाँ मंज़िल भी...तो जन्म हो चुका है सफर शुरू करो ज़िदंगी का जब तक साँसे हैं इस सफर मे अनगिनत मंज़िले हैं ढूंढो जल्दी से..
बिना रास्ते पर निकले मंज़िल का दीदार नही होता
रास्तो से बिना प्यार किए सफर पार नही होता
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