सबसे ज्यादा प्यार, अगर किसी से ये सवाल किया जाए कि आपसे सबसे ज्यादा प्यार कौन करता हैं? तो शायद इसका जबाव ' माँ ' होगा। और ये सच भी है ,वो माँ ही जो अपने बच्चे से सबसे ज्यादा प्यार करती हैं। माँ के प्यार और ममता की बहुत बातें या चर्चा होती है बहुत कुछ लिखा भी जाता हैं लेकिन की पिता का क्या ? पिता यानी जिनसे बच्चे डरते हैं जो हमेशा पढ़ाई लिखाई करियर की बातें करते हैं और हर गतिविधि पर दस तरह के सवाल करते हैं लेकिन क्या एक पिता की बातें या सोच यहीं तक सीमित हैं? शायद नहीं आइये आज मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ।
ये कहानी है राम किशोर शर्मा ,उनकी पत्नी कमला शर्मा और उनके बेटे राहुल शर्मा की । राम किशोर शर्मा एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है उनकी पत्नी हाउस वाइफ हैं दोनो दिल्ली में रहते हैं और उनका बेटा अहमदाबाद में पढ़ाई कर रहा हैं। एक दिन राहुल की तबियत कुछ खराब हो जाती है वो डॉक्टर से कंसल्ट करता है कुछ दिन बाद भी तबियत में कुछ खास सुधार नहीं हुआ तो राहुल की माँ ने राहुल को दिल्ली बुला लिया ये कहकर कीयहाँ फैमिली डॉक्टर को दिखा देंगे राहुल दिल्ली आता है और माँ तो अपनी ममता के अनुसार से व्यवहार करती है टेंशन, पैनिक और साथ में ये की राहुल की पिता को कोई चिंता ही नही है बेटे की तबियत खराब हैं लेकिन नौकरी ज्यादा जरूरी हैं बेटे की तबियत से । खैर डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा टेंशन की बात नहीं है लेकिन अगर दिक्कत ज्यादा दिन रहती है और बार बार होती है तो कुछ दिन बाद ऑपरेशन करना पड़ेगा ऑपेरशन का नाम का नाम नाम सुनकर राहुल की माँ का टेंशन सातवें आसमान पर पहुंच गया,उस समय राम किशोर शर्मा जी के भाई प्रेम किशोर शर्मा भी आये हुए थे। राहुल जी माँ चिंता में बैठी थी और प्रेम किशोर शर्मा से बात करते हुए कहती हैं," राहुल के पापा को तो कोई चिंता है नही ,सिर्फ नौकरी अब आज छुट्टी ली तो बैंक चल दिये पता नहीं क्या दिमाग में चलता रहता हैं इनके" । तभी राम किशोर शर्मा आ जाते हैं उनके भाई उनसे पूछते है कि वो बैंक किस काम से गये थे तो राम किशोर शर्मा जबाव देते है," कुछ नहीं बस जरा पैसे निकालने थे एकाउंट से अगर राहुल का ऑपरेशन करना पड़ा तो अचानक से पैसे अरेंज करने में कोई दिक्कत न हो इसीलिए पहले ही पैसों का टेंशन खत्म कर दिया आखिर मेरे बेटे के लिए पैसे की वजह से उसकी ज़िंदगी का एक मिनट भी नही रुकना चाहिए नहींअगर ऐसा हो जाये तो मेरे कमाने का कोई मतलब नहीं राह जाएगा और मुझे पता है कि तुमने ये सवाल क्यों पूछा देखो भाई में टेंशन लू उससे कुछ नहीं होगा अगर पेड़ की जड़ कमजोर पड़ जाएगी तो पूरा पेड़ ही टूट सकता है तो मुझे हर हालत में मजबूती के साथ खड़े रहना हैं और आने इस वृक्ष रूपी परिवार को हर समय मजबूती के साथ टिकाये रखना हैं अगर मैं ही कमजोर पड़ गया तो ये लोग तो फिर बिल्कुल ही टूट जाएंगे"।
तो ये तो हुई कहानी और इसका निष्कर्ष ये हैं कि जितना प्यार माँ अपने बच्चों से करती है उतना ही पिता भी बस फर्क इतना है माँ हमेशा अपने दिल का प्यार जुबान पर ले आती हैं और पिता सिर्फ दिल में ही रखता हैं वो इसलिए ताकि उसकी सन्तान प्यार में बिगड़ ना जाए और मुसीबत में कमजोर न पड़ जाए बाकी सन्तान माँ-बाप दोनों के लिए ही सबसे अनमोल होती हैं।
ये कहानी है राम किशोर शर्मा ,उनकी पत्नी कमला शर्मा और उनके बेटे राहुल शर्मा की । राम किशोर शर्मा एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है उनकी पत्नी हाउस वाइफ हैं दोनो दिल्ली में रहते हैं और उनका बेटा अहमदाबाद में पढ़ाई कर रहा हैं। एक दिन राहुल की तबियत कुछ खराब हो जाती है वो डॉक्टर से कंसल्ट करता है कुछ दिन बाद भी तबियत में कुछ खास सुधार नहीं हुआ तो राहुल की माँ ने राहुल को दिल्ली बुला लिया ये कहकर कीयहाँ फैमिली डॉक्टर को दिखा देंगे राहुल दिल्ली आता है और माँ तो अपनी ममता के अनुसार से व्यवहार करती है टेंशन, पैनिक और साथ में ये की राहुल की पिता को कोई चिंता ही नही है बेटे की तबियत खराब हैं लेकिन नौकरी ज्यादा जरूरी हैं बेटे की तबियत से । खैर डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा टेंशन की बात नहीं है लेकिन अगर दिक्कत ज्यादा दिन रहती है और बार बार होती है तो कुछ दिन बाद ऑपरेशन करना पड़ेगा ऑपेरशन का नाम का नाम नाम सुनकर राहुल की माँ का टेंशन सातवें आसमान पर पहुंच गया,उस समय राम किशोर शर्मा जी के भाई प्रेम किशोर शर्मा भी आये हुए थे। राहुल जी माँ चिंता में बैठी थी और प्रेम किशोर शर्मा से बात करते हुए कहती हैं," राहुल के पापा को तो कोई चिंता है नही ,सिर्फ नौकरी अब आज छुट्टी ली तो बैंक चल दिये पता नहीं क्या दिमाग में चलता रहता हैं इनके" । तभी राम किशोर शर्मा आ जाते हैं उनके भाई उनसे पूछते है कि वो बैंक किस काम से गये थे तो राम किशोर शर्मा जबाव देते है," कुछ नहीं बस जरा पैसे निकालने थे एकाउंट से अगर राहुल का ऑपरेशन करना पड़ा तो अचानक से पैसे अरेंज करने में कोई दिक्कत न हो इसीलिए पहले ही पैसों का टेंशन खत्म कर दिया आखिर मेरे बेटे के लिए पैसे की वजह से उसकी ज़िंदगी का एक मिनट भी नही रुकना चाहिए नहींअगर ऐसा हो जाये तो मेरे कमाने का कोई मतलब नहीं राह जाएगा और मुझे पता है कि तुमने ये सवाल क्यों पूछा देखो भाई में टेंशन लू उससे कुछ नहीं होगा अगर पेड़ की जड़ कमजोर पड़ जाएगी तो पूरा पेड़ ही टूट सकता है तो मुझे हर हालत में मजबूती के साथ खड़े रहना हैं और आने इस वृक्ष रूपी परिवार को हर समय मजबूती के साथ टिकाये रखना हैं अगर मैं ही कमजोर पड़ गया तो ये लोग तो फिर बिल्कुल ही टूट जाएंगे"।
तो ये तो हुई कहानी और इसका निष्कर्ष ये हैं कि जितना प्यार माँ अपने बच्चों से करती है उतना ही पिता भी बस फर्क इतना है माँ हमेशा अपने दिल का प्यार जुबान पर ले आती हैं और पिता सिर्फ दिल में ही रखता हैं वो इसलिए ताकि उसकी सन्तान प्यार में बिगड़ ना जाए और मुसीबत में कमजोर न पड़ जाए बाकी सन्तान माँ-बाप दोनों के लिए ही सबसे अनमोल होती हैं।
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